महिलाओं और बच्चियों के ख़िलाफ़ हिंसा न सिर्फ मानवाधिकार का मुद्दा है, बल्कि यह ‘नैतिक रूप से उनका तिरस्कार’ भी है और सभी समाजों के लिए ‘शर्म की बात’. महिलाओं विरुद्ध हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतॉनियो गुटेरेश ने यह बात कही. उन्होंने इस उत्पीड़न को समाप्त करने के लिए दुनिया भर के देशों का आह्वान किया.

महासचिव एंतॉनियो गुटेरेश ने अपने संदेश में कहा कि महिलाओं और बच्चियों के ख़िलाफ़ हिंसा और शोषण समावेशी, समतामूलक और सतत विकास की दिशा में बड़ी रुकावट पेश करते हैं.

महासचिव ने कहा, “जब तक आधी दुनिया यानी विश्व की महिलाएं और बच्चियां भयमुक्त नहीं होंगी और हिंसा और रोज़ाना की असुरक्षा से आज़ाद नहीं होंगी, तब तक हम यह नहीं कह पाएंगे कि हम एक निष्पक्ष और समतामूलक विश्व के वासी हैं.”

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने यह भी कहा कि महिलाओं और बच्चियों के ख़िलाफ़ किसी भी प्रकार की हिंसा का अर्थ है उनके प्रति इज़्ज़त कम होना. यह पुरुषों की विफलता है कि वे महिलाओं को अपने बराबर नहीं समझते, उनकी गरिमा को नहीं समझते और यह भी कि महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा व्यापक स्तर पर समाज में सत्ता और नियंत्रण की लड़ाई है.

उन्होंने कहा, “हम पुरुष प्रधान समाज में रहते हैं.” यहां महिलाएं हिंसा के प्रति अति संवेदनशील होती हैं और इसी के ज़रिए हम उन्हें अपने से कमतर साबित करते रहते हैं. इसका प्रभाव सिर्फ़ किसी एक व्यक्ति पर नहीं पड़ता बल्कि परिवारों और समाज पर भी इसका असर होता है.

उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के अनेक रूप हैं – घरेलू हिंसा से लेकर उनकी तस्करी, यौन शोषण से लेकर बाल विवाह, जेनिटल म्यूटिलेशन और कन्या भ्रूण हत्या तक.

महासचिव ने कहा कि सभी क्षेत्रों और सभी जगहों पर महिलाएं यौन शोषण पर बहस शुरू कर रही हैं और इस समस्या की विकरालता पर सभी का ध्यान आकृष्ट कर रही हैं. इस लज्जाजनक पहलू के प्रति महिलाओं की पहल उनकी ताक़त को दर्शाती है. यह बताती है कि इस अभियान के ज़रिए उत्पीड़न और हिंसा को समाप्त करने से संबंधित जागरूकता पैदा की जा सकती है.

महिलाओं और लड़कियों के साथ होने वाली हिंसा को समाप्त करने के लिए संयुक्त राष्ट्र का विश्वव्यापी अभियान UNiTE इस वर्ष – ‘Orange the World: #HearMeToo’ थीम के अंतर्गत पीड़ितों और उनके समर्थकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है.

एंतॉनियो गुटेरेश ने कहा, “ऑरेंज यानी नारंगी रंग एकजुटता का प्रतीक है. इसके साथ #HearMeToo यह स्पष्ट संकेत देता है कि महिलाओं और बच्चियों पर होने वाली हिंसा को अब बंद किया जाए. हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि इसमें हम सब भागीदार हैं.”

चुप्पी की संस्कृति ख़त्म हो – यूएन विमेन प्रमुख

महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता और महिला सशक्तीकरण के लिए संयुक्त राष्ट्र संस्था ‘UN Women’ की कार्यकारी निदेशक फुमजाइल मलाम्बो-एनजीक्यूका ने कहा कि यह थीम “पीड़ितों की बात सुनने और उन पर विश्वास करने” का आह्वान करती है ताकि चुप्पी की संस्कृति ख़त्म हो और किसी भी तरह की पहल और बदलाव में पीड़ितों पर ही मुख्य ध्यान रहे.

#HearMeToo को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, “हमें पीड़ित की विश्वसनीयता पर संदेह भरे सवाल उठाना बंद करना होगा, बल्कि उत्पीड़क की ज़िम्मेदारी तय करनी होगी. इसके लिए क़ानून को सही तरीक़े से लागू करने की ज़रूरत है.”

यूएन विमेन के अनुसार, महिलाओं और बच्चियों पर हिंसा करने वाले अधिकतर लोगों को सज़ा नहीं होती, सिर्फ़ कुछ ही मामलों की पुलिस में रिपोर्ट की जाती है, उससे भी कम लोगों के ख़िलाफ आरोप तय होते हैं, और उनमें से भी बहुत थोड़े से लोगों का दोष सिद्ध होता है.

फुमजाइल ने कहा, “पुलिस और न्यायिक संस्थाओं को इन रिपोर्ट्स को गंभीरता से लेना चाहिए और पीड़ितों की सुरक्षा और हित की तरफ सबसे ज़्यादा ध्यान देना चाहिए. जैसे हिंसा की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए अधिक संख्या में महिला पुलिस अधिकारियों को नियुक्त किया जाए.”

उन्होंने कहा कि क़ानून को ये मानना होगा कि यौन शोषण महिलाओं के साथ एक तरह का भेदभाव और मानवाधिकार उल्लंघन है. उन्होंने औपचारिक और अनौपचारिक कार्यस्थलों पर क़ानूनी संरक्षण का आह्वान किया ताकि सबसे अधिक संवेदनशील श्रमिक समूह उत्पीड़न के ख़िलाफ अपनी आवाज़ बुलंद कर सकें और उनकी बात सुनी जाए. इनमें वो श्रमिक समूह शामिल हैं जिनका जीविकोपार्जन ग्राहकों द्वारा दी जाने वाली बख़्शिश यानी टिप्स पर निर्भर करता है.

फुमजाइल ने कहा, “इसमें नियोक्ताओं और रोज़गारदाताओं की भी बड़ी भूमिका है.”

“नियोक्ता हर देश में आचरण संबंधी मानदंडों को स्वतंत्र तरीक़े से लागू करते हुए महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं जिससे महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता क़ायम हो और किसी भी तरह के उत्पीड़न को सहन न किया जाए.”

महिलाओं के लिए घर सबसे ख़तरनाक जगह है, नई संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट एक हैरान करने वाला निष्कर्ष प्रस्तुत करती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2017 में विश्व स्तर पर लगभग 50,000 महिलाओं की हत्या उनके अंतरंग साथियों (इंटिमेट पार्टनर्स) या परिवार के सदस्यों ने की थी. रिपोर्ट में पुलिस, न्यायिक एवं सामाजिक प्रणाली के बीच अधिक समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया गया ताकि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो.

संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (यूएनओडीसी) द्वारा जारी विश्वव्यापी रिपोर्ट होमोसाइड: जेंडर रिलेटेड किलिंग ऑफ विमेन एंड गर्ल्स के अनुसार, 2017 में दुनिया भर में लगभग 87,000 महिलाओं की जानबूझकर हत्या की गई.

इस अध्ययन में पाया गया कि हाल के वर्षों में हत्या की शिकार महिलाओं को बचाने की दिशा में कोई ख़ास प्रगति नहीं हुई. जबकि महिलाओं पर होने वाली हिंसा को समाप्त करने के लिए क़ानून और योजनाएं दोनों मौजूद हैं.

यूएनओडीसी के कार्यकारी निदेशक यूरी फेदोतोफ़ ने कहा, “महिलाओं के साथ भेदभाव और नकारात्मक सोच का ख़ामियाज़ा सबसे ज़्यादा महिलाओं को उठाना पड़ रहा है […] अंतरंग साथी या परिवार के सदस्य द्वारा उनकी हत्या की अधिक आशंका होती है.” यूरी फेदोतोफ़ ने लिंग आधारित हत्याओं को रोकने के लिए विशेष पहल किए जाने की मांग की.

रिपोर्ट में निष्कर्ष के तौर पर कहा गया कि पुलिस और न्यायिक प्रणाली तथा स्वास्थ्य एवं सामाजिक सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय किए जाने की ज़रूरत है. साथ ही यह भी कहा गया कि इस समस्या के समाधान में पुरुषों को भी भागीदार बनाया जाना चाहिए और इसकी शिक्षा शुरुआत से ही दी जानी चाहिए.

अंतरराष्ट्रीय दिवस

दिसंबर 1999 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 25 नवंबर को महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाली हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित कियाथा. इसमें सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और ग़ैर सरकारी संगठनों को भागीदार बनाने का आहवान किया गया है. इस दिवस का ये भी तक़ाज़ा है कि ये सभी मिलकर इस मुद्दे पर व्यापक जागरूकता फैलाने का काम करें.

यह दिन डोमिनिक गणराज्य की राजनैतिक कार्यकर्ता तीन मिराबल बहनों की स्मृति में मनाया जाता है. 1960 में इसी दिन डोमिनिक शासक राफेल ट्रजिलो (1930-1961) के आदेश पर उनकी हत्या कर दी गई थी.