वर्ष 2018 का नोबेल शान्ति पुरस्कार इराक़ी मूल की एक यज़ीदी मानवाधिकार कार्यकर्ता व संयुक्त राष्ट्र की एक सदभावना दूत नादिया मुराद और कोंगो गणराज्य (डीआरसी) के एक चिकित्सक डॉक्टर डेनिस मुकवेगे को देने की घोषणा की गई है.

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि युद्ध और संघर्ष वाले क्षेत्रों में यौन हिंसा को बन्द करना अब भी संगठन के लिए एक प्राथमिकता है.

संयुक्त राष्ट्र के नशीले पदार्थों और अपराध पर कार्यालय (UNODC) की सदभावना दूत नादिया मुराद और कोंगो गणराज्य के डॉक्टर मुकवेगे को 2018 का नोबेल शान्ति पुरस्कार दिए जाने से यौन हिंसा को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने के चलन को रोकने में मदद मिलेगी.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतॉनियो गुटेरेश ने न्यूयॉर्क स्थित मुख्यालय में में इस अवसर पर कहा कि इन दोनों कार्यकर्ताओं ने यौन हिंसा के पीड़ितों की मदद करके, दरअसल साझा मूल्यों की रक्षा की है.

महासचिव ने डॉक्टर डेनिस मुकवेगे के साहस की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने संघर्ष और युद्ध में यौन हिंसा और बलात्कार की शिकार हुई महिलाओं का आत्मसम्मान बहाल करने और उनके बिखरे हुए शरीरों को एक सर्जन के रूप में संभालकर एक असाधारण काम किया है. साथ ही ऐसा करके उन्होंने पीड़ितों का सम्मान और उनमें उम्मीद भी बहाल की है.

महासचिव एंतॉनियो गुटेरेश ने कहा कि नादिया मुराद ने इराक़ के उत्तरी इलाक़ों में उन इंसानों की उन तकलीफ़ों के बारे में आवाज़ बुलन्द की है जिनके बारे में कोई भी बात करने से डरता है. ये घटनाएँ तब की है जब 2014 में दाएश के आंतकवादियों ने इराक़ के उत्तरी इलाक़े में यज़ीदी समुदाय को क्रूर रूप से निशाना बनाया था.

“नादिया मुराद ने मानव तस्करी और यौन ग़ुलामी का शिकार बनाई गई लड़कियों और महिलाओं के समर्थन और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए साहसिक रूप से आवाज़ बुलन्द की है.”

‘पीड़ितों का भी पुरस्कार’

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख का कहना था कि नोबेल शान्ति पुरस्कार उस मुहिम का एक हिस्सा है जो दुनिया भर में लड़कियों और महिलाओं द्वारा अनुभव की जा रही हिंसा और अन्याय को समझने के लिए चलाई जा रही है और ये मुहिम लगातार ज़ोर पकड़ रही है.

महासचिव एंतॉनियो गुटेरेश का कहना था कि दस वर्ष पहले सुरक्षा परिषद ने सर्वसहमति से प्रस्ताव पारित करके युद्ध में यौन हिंसा को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने की तीखी भर्त्सना की थी. आज नोबेल कमेटी ने भी स्वीकार किया है कि नादिया मुराद और डॉक्टर डेनिस मुकवेगे के प्रयास शान्ति के लिए बहुत कारगर तरीक़े हैं.

“मानवाधिकारों के इन चैम्पियनों को नोबेल शान्ति पुरस्कार से सम्मानित किया जाना दुनिया भर के उन अनगिनत पीड़ितों को भी पहचान देना है जिन्हें यौन हिंसा का शिकार बनाया गया, समाज में सताया गया और भुला दिया गया. ये उनका भी पुरस्कार है… आइए, हम सभी इन नोबेल विजेताओं का सम्मान करके उन सभी पीड़ितों और प्रभावितों के लिए अपना समर्थन व्यक्त करते हैं जो दुनिया भर में कहीं भी यौन हिंसा का शिकार हुए हैं.”

UN Photo/Manuel Elias 2018 Nobel Peace Prize winner, Nadia Murad, is the UNODC Goodwill Ambassador for the Dignity of Survivors of Human Trafficking. In this photo from 2017, she is participating in a panel discussion at UN Headquarters in New York.

नादिया मुराद ने इराक़ में लड़कियों और महिलाओं को यौन तस्करी से बचाने के लिए असाधारण काम किया है. उधर डॉक्टर डेनिस मुकवेगे ने कोंगो गणराज्य में यौन हिंसा की शिकार लड़कियों और महिलाओं की सहायता के लिए अथक काम किया है.

संयुक्त राष्ट्र के नशीले पदार्थों और अपराध पर कार्यालय UN Office on Drugs and Crime (UNODC) ने भी नोबेल शान्ति पुरस्कार की घोषणा का स्वागत किया है. इस कार्यालय ने नादिया मुराद को 2016 में मानव तस्करी के शिकार लोगों की प्रतिष्ठा के लिए 2016 में सदभावना दूत नियुक्त किया था. ख़ुद नादिया मुराद भी इराक़ में आइसिल चरमपंथियों के हाथों क्रूर बर्ताव का शिकार हो चुकी हैं.

UNODC के कार्यकारी निदेशक यूरी फेदोतॉफ़ ने नादिया मुराद के साहस की सराहना करते हुए कहा कि उनकी आपबीती हम सभी को याद दिलाती है कि हम उनकी बात ध्यान से ज़रूर सुनें जो ऐसे अपराधों के शिकार हुए हैं जिन्हें हम सभी रोकना चाहते हैं.

उन्होंने उम्मीद जताई कि नादिया मुराद जैसे प्रभावितों की आपबीती और जीवन न्याय हासिल करने के हमारे प्रयासों को और मज़बूत करेगा. यूरी फ़ेदोतॉफ़ का कहना था,

“इस अदभुत घोषणा पर यक़ीन नहीं आ रहा है कि नोबेल शान्ति पुरस्कार दो और बहुत योग्य और सक्षम कार्यकर्ताओं को मिला है – नादिया मुराद और डॉक्टर डेनिस मुकवेगे. ये नोबेल शान्ति पुरस्कार दो बहुत ही असाधारण, साहसी, मेहनती और प्रभावशाली कार्यकर्ता हैं जिन्होंने यौन हिंसा जैसे अभिशाप के ख़िलाफ़ अभियान चलाया. ख़ासतौर से यौन हिंसा कौ युद्ध के एक हथियार के रूप में इस्तेमाल को रोकने के लिए इन दोनों ने ऐतिहासिक काम किया है.”

संयुक्त राष्ट्र की जिनीवा में प्रवक्ता अलेस्सान्द्रा वेलुस्सी ने नोबेल शान्ति पुरस्कार घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि ध्यान दिलाने की बात है कि संयुक्त राष्ट्र के लिए यौन हिंसा को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने को रोकना उच्च प्राथमिकता है. जैसाकि हम सभी जानते हैं, संघर्षों और युद्धों में यौन हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष प्रतिनिधि (Sexual Violence in Conflict) सक्रिय हैं जिनका नाम है प्रमिला पैटन. मैं विश्वस्त हूँ कि ये नोबेल शान्ति पुरस्कार युद्ध और संघर्षों में यौन हिंसा को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के चलन को बन्द करने में मददगार साबित होगा. विजेताओं को बधाई.”