महासचिव एंतॉनियो गुटेरेश ने विश्व नेताओं का आहवान करते हुए कहा है कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने के लिए किए जा रहे उपायों और विकास कार्यक्रमों के बीच कोई टकराव नहीं है, बल्कि ये एक दूसरे के लिए अनुकूल हैं.

महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया है. नरेन्द्र मोदी को ये सम्मान जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण की चुनौतियों का सामना करने के लिए असाधारण प्रयास करने के लिए दिया गया है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पुरस्कृत करने के लिए आयोजित समारोह में महासचिव ने तमाम विश्व नेताओं का भी आहवान किया कि वो भारत से सबक़ सीखें और जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने के प्रयासों कामयाबी हासिल करने के लिए ये योजनाएँ और कार्यक्रम अपने यहाँ लागू करें.

भारत की राजधानी दिल्ली ंमें बुधवार को उन्होंने कहा, “हरित अर्थव्यवस्था एक अच्छी अर्थव्यवस्था है. टैक्नोलॉजी इस मामले में इंसानों का साथ देने के लिए तैयार और सक्षम है. जो लोग और देश प्रदूषण पैदा करने वाली अर्थव्यवस्था की हिमायत करेंगे वो भविष्य भी ऐसा ही देखेंगे. जबकि दूसरी तरफ़ भारत जैसे देश हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं तो आने वाले दशकों में ये वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.”

चैम्पियन्स ऑफ़ द अर्थ (Champions of the Earth) नामक ये सम्मान देते हुए महासचिव ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी एक असाधारण विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं.”

“प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक तापमान में वृद्धि को रोकने के फ़ायदों को ना सिर्फ़ भलीभाँति पहचानते, जानते और समझते हैं, बल्कि ये सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अभूतपूर्व ऊर्जा के साथ अथक काम भी करते हैं. और इस तरह के नेतृत्व की बहुत ज़्यादा ज़रूरत है.”

संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी को प्लास्टिक के इस्तेमाल पर नियंत्रण पाने के लिए असाधारण प्रयास करने के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. इसमें वर्ष 2022 तक सिर्फ़ एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक पर पूरी तरह रोक लगाने का संकल्प भी शामिल है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्राँ के साथ मिलकर अन्तरराष्ट्रीय सौर अलायंस को आगे बढ़ाने के क्षेत्र में भी असाधारण काम करने के लिए नरेन्द्र मोदी को सम्मानित किया गया है. इस सौर अलांयस में विश्व भर में सौर ऊर्जा के उत्पादन और प्रयोग को बढ़ावा देने और पर्यावरण प्रदूषण करने वाले ईंधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं.

महासचिव ने अमृतसर स्थित स्वर्ण मन्दिर की भी यात्रा की और लंगर में हिस्सा लियाप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ये पुरस्कार स्वीकार करते हुए कहा कि वो ये प्रयास करोड़ों भारतवासियों की तरफ़ से कर रहे हैं जो पर्यावरण की सुरक्षा के लिए हर दिन प्रयास और काम करते हैं.

“इनमें वो मछुआरे भी शामिल हैं जो अपनी ज़रूरतों के अनुसार ही मछलियों का शिकार करते हैं, वो आदिवासी समुदाय भी हैं जो वनों और जंगलों को अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं. हम जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना तब तक नहीं कर सकते जब तक कि इन प्रयासों को हम अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में शामिल करके इन्हें अपनी संस्कृति का हिस्सा नहीं बनाएंगे. बिल्कुल यही बात है कि भारत अपने पर्यावरण की ख़ातिर इतने ज़्यादा प्रयास कर रहा है.”

स्वर्ण मन्दिर में लंगर

महासचिव एंतॉनियो गुटेरेश ने बुधवार को अमृतसर में स्वर्ण मन्दिर की भी यात्रा की. सिखों के पवित्र धर्म स्थल स्वर्ण मन्दिर में उन्होंने लंगर में भोजन ग्रहण किया. ग़ौरतलब है कि सिखों के धार्मक स्थल गुरूद्वारों में चलाए जाने वाले लंगरों में निशुल्क भोजन परोसा जाता है जिसमें सिख वॉलंटियर्स स्वेच्छा और गहरे धार्मिक सेवा भाव से योगदान करते हैं. इस लंगर में पौष्टिक भोजन और साफ़ पानी परोसा जाता है.

 

महासचिव ने राजघा में महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि भी अर्पित की

महासचिव ने राजघा में महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि भी अर्पित की

स्वर्ण मन्दिर की इस यात्रा के दौरान महासचिव ने स्वर्ण मन्दिर द्वारा जारी लंगर की परम्परा की प्रशंसा करते हुए कहा कि ये भोजन जैसी आवश्यक चीज़ को अन्य लोगों के साथ मिल-बाँटकर खाने की असाधरण भावना का प्रतिनिधित्व करती है जिसमें हर किसी को भोजन मिलता है. लेकिन भोजन से भी ज़्यादा वो भावना है जिसमें शान्ति और सदभावना जैसे मूल्यों की झलक पेश करती है जिसकी आज की दुनिया को बहुत ज़्यादा ज़रूरत है.

स्वर्ण मन्दिर में हर दिन हज़ारों-लाखों लोग धार्मिक संस्कार पूरे करने के लिए आते हैं लंगर में हिस्सा लेते हैं. पूरी दुनिया में ये सबसे बड़ा सामुदायिक किचन है जहाँ एक दिन इतनी बड़ी संख्या में लोग मुफ़्त भोजन खाते हैं और बहुत साले श्रद्धालु इसमें गहरी भावना से सेवा करते हैं. ये लंगर किचन दिन के 24 घंटों यानी हर वक़्त खुला रहता है जिसका मतलब है कि कोई भी इंसान किसी भी आकर यहाँ भोजन ग्रहण कर सकता है. एक और अदभुत बात ये है कि इस लंगर में कोई प्लास्टिक या इस्तेमाल के बाद फेंक दी जाने वाली चीज़ें प्रयोग नहीं होती हैं, सारे बर्तन स्टील के होते हैं जिससे पर्यावरण को भी बड़ा फ़ायदा होता है.

महासचिव एंतॉनियो गुटेरेश ने इस पद पर भारत की अपनी पहली यात्रा की है जिस दौरान उन्होंने महात्म गांधी को 150वें जन्म दिन पर राजघाट में श्रद्धांजलि भी अर्पित की. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की बड़ी इमारत का भी उदघाटन किया जिसका नाम रखा गया है – वन यू एन हाउस जहाँ से अब इस संगठन की सभी एजेंसियाँ काम करेंगी.

महासचिव ने भारत सरकार के वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों के साथ अनेक मुद्दों पर बैठकें कीं, राष्ट्रपति से मुलाक़ात की और महात्मा गांधी स्वच्छता सम्मेलन में भी शिरकत की.

‘चैम्पियन्स ऑफ़ द अर्थ’ पुरस्कार

इस पुरस्कार की शुरूआत संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने 2005 में की थी. ये ऐसे व्यक्तियों, संगठनों, सिविल सोसायटी और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों को दिया जाता है जिन्होंने पर्यावरण में सुधार लाने के लिए असाधारण काम किए हों.

महासचिव की पहली आधिकारिक भारत यात्रा 2018

वर्ष 2018 के लिए इस पुरस्कार को पाने वालों में शामिल हैं…

Impossible Foods and Beyond Meat – इस संगठन ने माँस के उच्च स्तर के शाकाहारी विकल्प तलाश करने में असाधरण काम किया है,

Zhejiang River Chiefs programme – ये संस्था पानी को प्रदूषित होने से बचाने और प्रकृति को नष्ट होने और उसे पूर्व अवस्था में लाने के लिए असाधारण काम कर रही है,

जोआन कार्लिंग (Joan Carling) – इंडीजिनस लोगों और पर्यावरण अधिकारों के लिए काम करने वाले एक एक्टिविस्ट,

कोच्चि अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Cochin International Airport) – भारत के केरल राज्य में बना ये विश्व का पहला ऐसा हवाई अड्डा है जो पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित होगा,

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्राँ – पर्यावरण एक्शन के लिए असाधरण अन्तरराष्ट्रीय सहयोग.