दुनिया भर में प्रवासियों की समस्याओं को जानने-समझने और उनका हल निकालने के लिए एक समझौते पर विचार करने के लिए विश्व नेताओं ने बुधवार को सयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक अहम बैठक की.

इस दौरान प्रवासियों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण काम करने वाले एक संगठन Justice for Migrant Women की संस्थापक मोनिका रेमिरेज़ ने शब्दों को ठोस कार्रवाई में तब्दील करने और प्रवासियों के हालात में बेहतरी लाने के लिए और ज़्यादा मेहनत करने का आग्रह किया है.

प्रवासियों के हालात बेहतर बनाने के इरादे से एक नया समझौता इस साल दिसम्बर में मोरक्को के मराकेश में लागू किया जाएगा. जिसके लिए तैयारियाँ ज़ोर-शोर से जारी हैं. इस समझौते का नाम है –  Global Compact for Safe, Orderly and Regular Migration.

इस समझौते में मुख्य रूप से 23 लक्ष्य रखे गए हैं जिनमें प्रवासियों से सम्बन्धित तमाम पहलुओं को शामिल किया गया है. इनमें प्रवासियों के लिए क़ानूनी विकल्प उपलब्ध होना, कामकाज और श्रम के बेहतर और नैतिक मानकों को बढ़ावा देना, मानव तस्करी को रोकने के लिए ठोस उपाय करना और प्रवासियों की सम्मानजनक वापसी सुनिश्चित करना शामिल है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र के कार्यक्रमों से हटकर हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में मोनिका रेमिरेज़ का कहना था, “हम सभी अच्छी तरह जानते हैं कि अगर ग्लोबल कॉम्पैक्ट को सफल बनाना है तो संयुक्त राष्ट्र के हर सदस्य देश को ठोस उपाय करने होंगे, इनमें देश की सीमाओं में दाख़िल होने वाले सभी लोगों के लिए समानता और सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले क़ानून और हालात बनाना शामिल होगा.

तीन कहानियाँ

मोनिका रेमिरेज़ ने तीन ऐसी महिलाओं की कहानियाँ पेश कीं जिनसे ये पता चलता है कि कौन से ऐसे मुख्य और प्रबल कारण हैं जिनकी वजह से लोग अपना सामान्य निवास स्थान छोड़कर प्रवासन के लिए तैयार हो जाते हैं…

डॉलोरेस एक ऐसी प्रवासी महिला है जिसने वर्षों तक अपने पति के हाथों हिंसा बर्दाश्त करने के बाद देश छोड़ दिया. लेकिन वो बेहतर हालात और सुरक्षा की तलाश में जिस देश में पहुँची, वहाँ भी उसे यौन प्रताड़ना और दुर्व्यहार झेलना पड़ा.

मैरीसॉल को बेहतर कामकाज के हालात और बेहतर आमदनी के वादे के साथ एक अस्थाई वीज़ा पर यात्रा करने का मौक़ा दिया गया. लेकिन दरअसल उसे मानव तस्करी का शिकार बनाया गया. और जिस देश में वो काम कर रही थी वहाँ उसका ये वीज़ा किसी और कामकाज के लिए स्थानान्तरित भी नहीं हो सकता था.

ऐडिथ ने छात्र वीज़ा पर प्रवासी के रूप में सफ़र किया. वो अमरीका में रहकर अपनी दुनिया और भविष्य संवारना चाहती थी. सौभाग्य से उसे बिल्कुल अलग प्रवासी अनुभव हुआ और वो एक सफल उद्यमी बन गई. उसका प्रवासन अनुभव बाक़ी दो महिलाओं से बिल्कुल अलग था क्योंकि उसकी शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि अलग थी.

डॉलोरेस, मैरिसॉल और एडिथ जैसे प्रवासी जिस देश में जाकर बसते और कामकाज करते हैं वहाँ वो बहुत से सांस्कृतिक और सामाजिक फ़ायदे पहुँचाते हैं. इसके अलावा बहुत से आर्थिक फ़ायदे तो पहुँचाते ही हैं.

मोरिका रेमिरेज़ का कहना था कि जब तक साझे लक्ष्य और नियम व मानक नहीं बनाए जाते हैं, तब तक प्रवासियों के साथ असमानता और भेदभाव वाला बर्ताव नहीं रुकेगा. प्रवासियों को हिंसा, मानव तस्करी और शोषण का शिकार बनाया जाता रहेगा. इन हालात का शिकार होने वालों में क़रीब पाँच करोड़ वो बच्चे भी हैं जो प्रवासी परिवारों से सम्बन्धित होने के नाते नाज़ुक हालात का सामना करते हैं.

भेजते हैं रक़म

ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक़ दुनिया भर में इस समय क़रीब 26 करोड़ प्रवासी हैं. ये प्रवासी जहाँ रहते हैं वहाँ कामकाज करके टैक्स अदा करते हैं और क़रीब 85 फ़ीसदी आमदनी उसी देश में ख़र्च करते हैं.

वो अपनी आमदनी का क़रीब 15 फ़ीसदी हिस्सा अपने मूल देश को भेजते हैं जिससे उन देशों को विदेशी मुद्रा अर्जित करने का फ़ायदा होता है. साल 2017 के दौरान प्रवासियों ने विकासशील देशों को क़रीब 45 अरब डॉलर की रक़म भेजी. ये दुनिया भर में दी जाने वाली कुल विकास राशि का क़रीब तीन गुना है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष मरिया फ़रनेन्डा एस्पिनोसा ने कहा कि ग्लोबल कॉम्पैक्ट के ज़रिए लोगों की ज़िन्दगियाँ बचाई जा सकेंगी, बेहद कमज़ोर लोगों को सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी और हज़ारों महिलाओं, बच्चों और पुरुषों की असमय मौतों को रोका जाएगा.

उन्होंने कहा कि ग्लोबल कॉम्पैक्ट के तहत प्रयासों के ज़रिए मानव तस्करी को रोकने और उसके नैटवर्कों को समाप्त करने, प्रवासियों के साथ दुर्व्यवहार को रोकने और प्रवासी परिवारों को बिछड़ने से रोकने में मदद मिलेगी. इसलिए मराकेश का रास्ता एक उम्मीद का रास्ता है.

महासचिव एंतॉनियो गुटेरेश ने भी इस अवसर पर कहा कि प्रवासन एक ऐतिहासिक और बहुपक्षीय अवधारण है जिससे मानवीय, मानवाधिकार और जनसंख्या से सम्बन्धित मुद्दे जुड़े हुए हैं. प्रवासन के साथ बहुत जटिल आर्थिक, पर्यावरण और राजनैतिक मुद्दे जुड़े हुए हैं और प्रवासन के सम्बन्ध में बहुत से विभिन्न, वैध और पक्के मत नज़र आते हैं.

उनका कहना था कि दुर्भाग्य से प्रवासन एक ऐसा मुद्दा भी है जिसे राजनैतिक फ़ायदों के लिए ग़लत तरीक़े से पेश किया गया है. अनियमित और कुप्रबन्धित तरीक़े से हुए प्रवासन ने स्थानीय समुदायों में नकारात्मक और ग़लत अवधारणाएँ पैदा कर दी हैं. इस वजह से प्रवासियों के बारे में दुष्प्रचार, उनके बारे मे असहिष्णुता और नस्लवाद तक का माहौल देखने को मिलता है.

महासचिव ने कहा कि इन्हीं कारणों की वजह से इस बिल्कुल अपनी तरह के पहले Global Compact for Safe, Orderly and Regular Migration पर इस समझौते का मसौदा तैयार करने में कुछ कठिनाइयाँ तो आईं मगर साथ ही इसे एक बहुत बड़ी उपलब्धि भी कहा जाएगा.