संयुक्त राष्ट्र महासभा के 73वें सत्र की अध्यक्ष मरिया फ़रनेन्डा एस्पिनोसा ने दुनिया भर के सभी इंसानों के लिए बराबरी और टिकाऊ विकास लक्ष्य हासिल करने के प्रयासों में बहुलवाद यानी एक साथ मिलजुलकर काम करने की संस्कृति को बहुत महत्वपूर्ण क़रार दिया है.

उन्होंने मंगलवार को महासभा के 73वें सत्र और जनरल डिबेट की औपचारिक शुरूआत करते हुए ये विचार रखे.    

उन्होंने ध्यान दिलाते हुए कहा कि मानवता के लिए संयुक्त राष्ट्र का असाधारण योगदान रहा है क्योंकि अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सह अस्तित्व को सम्भव बनाने वाले सिद्धान्त निर्धारित करने में संयुक्त राष्ट्र ने ही रास्ता दिखाया है.

उन्होंने कहा, “वास्तविकता ये है कि संयुक्त राष्ट्र का कामकाज और भूमिका जितने 73 वर्ष पहले प्रासंगिक थे, उतने ही आज भी हैं. हमारे सामने मौजूद चुनौतियों का सिर्फ़ एक मात्र सम्भव समाधान बहुलवाद को अपनाना ही हो सकता है.”

“बहुपक्षवाद यानी मिलजुलकर साथ चलने की संस्कृति और सिद्धान्तों यानी बहुलवाद को कमज़ोर करने या इस पर सवाल उठाने से सिर्फ़ अस्थिरता, भ्रम, अविश्वास और ध्रुवीकरण को बल मिलता है.”

उनका कहना था कि दुनिया भर में लाखों लोग लगातार हिंसा, युद्ध और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से भीषण तबाही और समस्याओं का सामना कर रहे हैं.

उन लाखों के लिए अनिश्चितता और डर रोज़मर्रा की ज़िन्दगी का हिस्सा है. उनके चकनाचूर हो चुके सपनों और नाउम्मीदी के इन हालात और मजबूरी का फ़ायदा कुछ लोग क्रूरता के साथ उठाते हैं.

इन्हीं विवशता के हालात का फ़ायदा उठाकर कुछ लोग समुदायों में दरार डालने, नस्लवाद को बढ़ाने, लोगों और समुदायों के बीच नफ़रत फैलाकर हिंसा भड़काने से भी बाज़ नहीं आते.

इंसानों की तकलीफ़ों से भला कोई कैसे मुँह फेर सकता है.

उन्होंने कहा कि युद्ध, संघर्ष, आर्थिक संकट और पर्यावरण के गिरते स्तर से हम सभी बराबर रूप से प्रभावित होते हैं.

मरिया फ़रनेन्डा एस्पिनोसा का कहना था कि अब जबकि दुनिया ज़्यादा सिमटी हुई नज़र आती है तो वैश्विक स्तर पर बातचीत और बहुलवाद के साथ लिए गए फ़ैसलों और कार्रवाइयों के ज़रिए बहुत सी समस्याओं का ठोस समाधान निकाला जा सकता है.

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों से बहुलवाद यानी सहकारिता के एजेंडा के लिए ताज़ा संकल्प दिखाने का आहवान भी किया.