संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतॉनियो गुटेरेश ने युवाओं के विचारों को मूर्त रूप देने के लिए एक नई रणनीति शुरू की है जिसका नाम है – यूथ2030. इस रणनीति के तहत युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और उनकी आवाज़ों को ज़्यादा अहमियत देने पर विशेष ज़ोर रहेगा.

सोमवार को न्यूयॉर्क में ये रणनीति शुरू करते हुए उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में इतने सारे युवाओं को एक साथ देखना बिल्कुल अनोखा अनुभव है, सचमुच बिल्कुल अदभुत.

उन्होंने ध्यान दिलाते हुए कहा कि आज हमारी दुनिया बहुत युवा है, इस दुनिया में क़रीब एक अरब 80 करोड़ युवा हैं, जो 10 से 24 वर्ष की उम्र के हैं – इतिहास में इतनी बड़ी युवा आबादी कभी नहीं रही.

“आज के युवाओं के सामने विशाल चुनौतियाँ हैं. और ऐसा वैश्वीकरण, नई टैक्नोलॉजी, विस्थापन, नागरिक गतिविधियों के लिए घटते स्थान, श्रम बाज़ारों के बदलते स्वरूप और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के परिणामस्वरूप हुआ है.”

उनका अफ़सोस जताते हुए कहा कि युवाओं की कुल आबादी का क़रीब 20 फ़ीसदी हिस्सा रोज़गार, शिक्षा और प्रशिक्षण के अवसरों से वंचित है. हर चार में से एक युवा किसी ना किसी तरह की हिंसा या सशस्त्र संघर्षों के हालात से प्रभावित है.

“लाखों लड़कियाँ कम उम्र में ही माँ बन जाती हैं जब वो ख़ुद भी बाल अवस्था में होती हैं. इससे उनका स्वास्थ्य गम्भीर रूप से प्रभावित होता है जो उन्हें ग़रीबी के चक्र में धकेल देता है.”

आँकड़े बताते हैं कि ख़ुद को नुक़सान पहुँचाने वाली यानी आत्मघाती प्रवृति की वजह से हर साल क़रीब 67 हज़ार किशोरों की मौत हो जाती है.

“अक्सर देखा गया है कि युवाओं को विकास के कार्यक्रमों में शामिल ही नहीं किया जाता है, शान्ति वार्ताओं में उनकी अनदेखी होती है, उन्हें अपनी राय ज़ाहिर करने का मौक़ा नहीं दिया जाता है और अक्सर बातचीत की मेज़ों पर उनके लिए कोई जगह ही नहीं होती है.”

हालाँकि उन्होंने तसल्ली जताते हुए कहा कि सिक्के का दूसरा सुखद पहलू ये है कि युवा लोग नए-नए विचारों, संकल्पनाओं और समस्याओं के अनोखे और रचनात्मक समाधानों के अपार स्रोत हैं.

उनका कहना था कि युवा ही टैक्नोलॉजी के क्षेत्र में ऐसे बदलाव ला रहे हैं जिनकी दुनिया को बहुत ज़रूरत है. ये बदलाव जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में और समाजों को ज़्यादा समानता और सबकी भागीदारी बनाने के लिए भी किए जा रहे हैं.

फलने-फूलने का मौक़ा

महासचिव ने कहा कि युवाओं को सशक्त बनाकर, उनकी रचनात्मक गतिविधियों में उनका साथ देकर और उनकी क्षमताओं और सम्भावनाओं को फलने-फूलने के अवसर मुहैया कराना भी ख़ुद में महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं. हम चाहते हैं कि ये अवसर हर जगह सभी लोगों के लिए सुनिश्चित हों.

लेकिन इससे भी ज़्यादा: अगर हमें सभी इंसानों के लिए शान्तिपूर्ण, टिकाऊ और ख़ुशहाल दुनिया बनानी है और 2030 का टिकाऊ विकास एजेंडा लागू करना है तो हमें युवाओं के नेतृत्व की ज़रूरत है.

“इसलिए आज मैं यहाँ, युवाओं के लिए संयुक्त राष्ट्र की नई रणनीति – यूथ-2030 का शुभारम्भ करते हुए बहुत प्रसन्न हूँ. इस रणनीति के तहत युवाओं को साथ लेकर चलने और उन्हें ज़्यादा सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है.”

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र दशकों तक युवाओं के लिए काम करता रहा है लेकिन यूथ2030 रणनीति के साथ, मैं चाहता हूँ कि संयुक्त राष्ट्र युवाओं के साथ काम करने में अग्रणी भूमिका निभाए. युवाओं की ज़रूरतों को समझे, उनके विचारों को मूर्त रूप देने और ये सुनिश्चित करने में कि युवाओं के विचारों को नीति निर्माण में उचित स्थान और महत्व मिले.

और जैसे-जैसे ये बदलाव होगा, हम अपने साझीदार संगठनों के साथ भी मिलकर काम करेंगे.

इस रणनीति में पाँच महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की गई है.

  1. हम युवाओं के साथ सम्पर्क बढ़ाने और उन्हें साथ लेकर चलने के लिए नए रास्ते खोलेंगे, और उन्हें अपने विचार व्यक्त करने के ज़्यादा मौक़े दिए जाएंगे.
  1. युवाओं को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने पर और ज़्यादा ध्यान दिया जाएगा.
  1. युवाओं को आर्थिक रूप से ज़्यादा सशक्त बनाना हमारी विकास रणनीतियों में प्राथमिकताओं में रखा जाएगा. इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण और कामकाज के मौक़े बढ़ाकर किया जाएगा.
  1. हम ये सुनिश्चित करने के लिए और ज़्यादा मज़बूती से काम करेंगे कि युवाओं के विभिन्न अधिकार सुनिश्चित हों, और उन्हें नागरिक और राजनैतिक गतिविधियों में बिना किसी रोकटोक के हिस्सा लेने का अवसर सुनिश्चित करने के लिए काम किया जाएगा.
  1. संघर्ष और मानवीय संकट वाले हालात मे रहने वाले युवाओं के लिए सहायता पहुँचाने को प्राथमिकता पर लाया जाएगा. साथ ही शान्ति प्रक्रियाओं में उनकी शिरकत भी सुनिश्चित की जाएगी.

जैनरेशन अनलिमिटेड

महासचिव ने आहवान करते हुए कहा कि इस रणनीति को कामयाब बनाने के लिए नए और साहसिक नज़रिए की ज़रूरत पड़ेगी और उनके युवा दूत इसमें बहुत अहम भूमिका निभाएंगे.

इस रणनीति के ज़रिए नई पार्टनरशिप यानू साझीदारियाँ भी बनेंगी, और उनमें से एक को शुरू करते हुए उन्हें विशेष प्रसन्नता व्यक्त की. इस पार्टनरशिप रणनीति का नाम है – जैनरेशन अनलिमिटेड.

जैनरेशन अनलिमिटेड (Generation Unlimited) एक बहु-पक्षीय पहल है जिसके ज़रिए ये सुनिश्चित करने के लिए काम किया जाएगा कि सभी युवाओं को स्कूली शिक्षा, प्रशिक्षण और रोज़गार मिले और ये लक्ष्य 2030 तक हासिल किए जाएँ.

इस पहल के तहत, विशेष रूप से लड़कियों के विभिन्न हुनर सीखने, रोज़गार और सशक्तिकरण के अवसर सुनिश्चित करने पर ज़्यादा ध्यान दिया जाएगा.

इस पूरी पहल के तमाम पहलुओं के केन्द्र में युवा लोग ही रहेंगे.

जैनरेशन अनलिमिटेड को शुरू करने में यूनीसेफ़ की हेनेरिएटा फ़ोर का शुक्रिया अदा करते हुए उनका कहना था कि उन्होंने ख़ासतौर पर युवाओं के विचार सुनने में बहुत समय निवेश किया है.

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि अलबत्ता अब वो युवा नहीं बचे हैं लेकिन ख़ुद को इस कार्यक्रम का सहअध्यक्ष होने के लिए सौभाग्यशाली समझते हैं. जैनरेशन अनलिमिटेड के अध्यक्ष रवाँडा के राष्ट्रपति श्रीमान पॉल कगामे बनाए गए हैं.

महासचिव का कहना था कि आज, संयुक्त राष्ट्र के पटल पर युवाओं के लिए एक नए युग की शुरूआत का दिन है और जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, यहाँ मौजूद हर व्यक्ति की इसमें मदद मिल सकती है.

उन्होंने सदस्य देशों का आहवान करते हुए कहा कि युवाओं का विकास करने और उन्हें सशक्त बनाने में ज़्यादा संसाधन लगाएँ. कारोबारी कम्पनियाँ युवाओं को ज़्यादा हुनरमन्द बनाने और उनके लिए कामकाज और विकास के अवसर मुहैया कराने के लिए हमारे साथ मिलकर काम करें.

“सिविल सोसायटी और ज़्यादा साहसिक बनें, अपनी आवाज़ बुलन्द करें और बेहतरी के लिए दबाव बनाए रखें. और, मैं सभी युवा पुरुषों और महिलाओं से कहता हूँ: हमारे साथ मिलकर चलें. हमारे साथ साइन अप करें, वॉलंटियर करें, अपने वोट का इस्तेमाल करें, और समाधानों का हिस्सा बनें.”

जॉर्डन की एक युवा डॉक्टर बतूल अल वहदानी ने भी यूथ2030 लाँच होने के मौक़े पर अपने विचार रखे.

जॉर्डन की एक युवा डॉक्टर बतूल अल वहदानी ने भी यूथ2030 लाँच होने के मौक़े पर अपने विचार रखे.

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को साझीदार और लीडर्स के रूप में युवाओं ज़रूरत है. जैसे-जैसे हम एक शान्तिपूर्ण और टिकाऊ विश्व बनाने की कोशिश कर रहे हैं, इस मुहिम में हमें युवाओं की सक्रिया भागीदारी की बहुत ज़रूरत है.

उम्मीदें, सपने, इच्छा शक्ति…

International Federation of Medical Students Association की एक युवा प्रतिनिधि बतूल अल वहदानी ने इस अवसर पर कहा कि हर दिन वो अपने भविष्य पर ध्यान केन्द्रित रखती हैं और समस्याओं का समाधान खोजने के लिए रचनात्मक सोच और तरीक़ों का सहारा लेती हैं.

उनका कहना था, “हमारे पास उम्मीदें हैं, सपने हैं, दृढ़ इच्छा शक्ति है और ऊर्जा है जिनके ज़रिए किसी भी तरह की समस्याओं के समाधान तलाश किए जा सकते हैं.”

तमाम युवाओं का आहवान करते हुए उन्होंने कहा कि नई रचनाएँ और आविष्कार करने, रोज़गार के अवसर बढ़ाने, शिक्षा की उपलब्धता बढ़ाने, मानवाधिकारों की रक्षा करने और अपनी मदद और विकास के लिए शान्तिपूर्ण बदलावों और क्रान्तियों के रास्ते निकालने के लिए टैक्नोलॉजी का सहारा लें.

“हम जानते हैं कि हमारे पास नेतृत्व करने की क्षमता है और हमारा ये अधिकार भी है, ना सिर्फ़ आज, ना सिर्फ कल बल्कि हर क्षण.

विश्व बैंक के अध्यक्ष जिम योंग किम ने भी प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि रोज़गार का स्वरूप बदल रहा है और बहुत से देश और लोग अभी इस बदलाव को समझ नहीं पा रहे हैं.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि दुनिया भर में 15 से 30 वर्ष की उम्र के क़रीब एक अरब 80 करोड़ लोग हैं. इनमें से क़रीब 50 करोड़ लोग विकासशील देशों में रहते हैं जिनके पास या तो रोज़गार नहीं है या है भी तो वो टिकाऊ नहीं है. इस उम्र के क़रीब 30 करोड़ लोगों के पास तो कोई रोज़गार या शिक्षा ही नहीं है.

उन्होंने दिलचस्प सन्दर्भ देते हुए कहा कि 1960 और 1970 के दौर में युवा अमरीकी कहा करते थे कि 30 वर्ष से ज़्यादा उम्र वाले लोगों पर भरोसा नहीं करना चाहिए. इसी साँस में उन्होंने युवाओं का आहवान करते हुए कहा कि उनके ख़ुद के भविष्य को प्रभावित करने वाले फ़ैसलों और नीतियों के लिए उन्हें 30 वर्ष से ज़्यादा उम्र के लोगों पर भरोसा नहीं करना चाहिए.

जिम योंग किम ने युवाओं का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा, “स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं पर कितने संसाधन ख़र्च होने चाहिए, ये फ़ैसला हम पर ना छोड़ें. बल्कि इन बुनियादी सेवाओं पर इतना धन ख़र्च ज़रूर करने के लिए ज़ोर डालें कि हर व्यक्ति को अपनी मनपसन्द का जीवन जीने और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने के अवसर मिल सकें.

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