D.A.R.E. अंग्रेज़ी में इन चार वर्णों को एक साथ लिखा जाए तो हिम्मत दिखाने वाले मतलब निकलता है. लेकिन अगर इन्हें अलग-अलग लिखा जाए तो ये चार वर्ण बहुत अर्थपूर्ण इरादों को ज़ाहिर कर सकते हैं. इन्हीं चार वर्णों को संयुक्त राष्ट्र महासभा की नई अध्यक्ष मरिया फ़र्नेन्डा एस्पिनोसा ने अपने इरादों और कामकाज के तरीक़े को व्यक्त करने के लिए प्रयोग किया है. इस सन्दर्भ में उनके इन चार वर्णों का ये मतलब दिया जा रहा है – D: Delivery यानी ठोस परिणामों का निष्पादन, A: Accountability – जवाबदेही, R: Relevance – प्रासंगिकता और E: Efficiency – निपुणता.

नई अध्यक्ष मरिया फ़रनेन्डा एस्पिनोसा ने कहा है कि वो अपने कार्यकाल के दौरान विश्व संस्था को लोगों के और ज़्यादा नज़दीक लाने के लिए कार्य करेंगी. मंगलवार, 18 सितम्बर को शुरू हुए महासभा के 73वें सत्र को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वो इस विश्व संस्था को लोगों का समर्थन और ज़्यादा बढ़ाने और इससे लोगों के लगाव को मज़बूत करने के लिए भी प्रयास करेंगी.

193 सदस्यों वाली महासभा को उनका ये पहला सम्बोधन था जिसमें उनका कहना था कि Multilateralism यानी बहुलवाद यानी सहकारिता की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए और ज़्यादा वैश्विक नेतृत्व की ज़रूरत है. इससे शान्तिपूर्ण, समतापूरक और टिकाऊ समाज बनाने में मदद मिलेगी और ये उनके कामकाज के प्रमुख मुद्दे रहेंगे. मरिया फ़रनेन्डा एस्पिनोसा का कहना था, “आइए, कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं, एक ऐसी दुनिया बनाने के लिए, जहाँ लोग ज़्यादा बराबरी महसूस कर सकें और लोगों को ज़्यादा स्वतंत्रताएँ हों, जो ज़्यादा टिकाऊ हो और जहाँ प्रकृति के लिए ज़्यादा सम्मान हो, एक एसा जहाँ जिसमें सभी इंसानों के लिए जगह हो और जहाँ सभी लोग एक दूसरे के लिए सहयोग वाला मिज़ाज रखते हों.”

“आइए, कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं, एक ऐसी दुनिया बनाने के लिए, जहाँ लोग ज़्यादा बराबरी महसूस कर सकें और लोगों को ज़्यादा स्वतंत्रताएँ हों, जो ज़्यादा टिकाऊ हो और जहाँ प्रकृति के लिए ज़्यादा सम्मान हो, एक एसा जहाँ जिसमें सभी इंसानों के लिए जगह हो और जहाँ सभी लोग एक दूसरे के लिए सहयोग वाला मिज़ाज रखते हों.”

मरिया फ़रनेन्डा एस्पिनोसा जून में इस पद के लिए निर्वाचित हुई थीं और उन्होंने 72वें सत्र के अध्यक्ष रह चुके मिरास्लोफ़ लैज़्शाक का स्थान लिया है. महासभा के अध्यक्ष पद पर निर्वाचित होने वाली वो इस विश्व संस्था के पूरे इतिहास में चौथी महिला हैं. साथ ही लातीनी अमरीकी और कैरीबियाई क्षेत्र से इस पद पर बैठने वाली पहली महिला.

महासभा को सम्बोधन में उन्होंने अपनी साथ प्राथमिकताएँ सामने रखीं जिनके ज़रिए वो सदस्य देशों के साथ राय-मश्विरा करके साल भर तक चलने वाले 73वें सत्र को आकार देने की कोशिश करेंगी. इनमें पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता को बढ़ावा देना, प्रवासियों और शरणार्थियों की समस्याओं और तकलीफ़ों को समझकर हल करने का लक्ष्य रखने वाला नया कार्यक्रम – Global Compact, कामकाज के सम्मानजनक माहौल की हिमायत करना, पर्यावरण की हिफ़ाज़त करना, विकलांगों के अधिकारों और सम्मान सुनिश्चित करने पर ध्यान देना, संयुक्त राष्ट्र में सुधार प्रक्रिया को समर्थन देना और बातचीत व सुलह-सफ़ाई की संस्कृति को आसान बनाना शामिल होगा.

मरिया फ़रनेन्डा एस्पिनोसा का कहना था, “मैं कहीं भी आपात हालात पैदा होने के साथ ही उनसे निपटने के लिए महासभा की त्वरित और प्रभावशाली कार्रवाई को आसान बनाने के लिए भी काम करने के लिए तैयार हूँ.”

“अफ़सोस की बात है कि दुनिया में आपात स्थितियाँ तो होनी ही हैं, और हमें उनका सामना करने के लिए तैयार रहना है.”

मरिया फ़रनेन्डा एस्पिनोसा ने ये संकल्प भी व्यक्त किया कि वो अपने कार्यालय में कामकाज के आदर्श माहौल और मूल्यों के लिए काम करेंगी. और ये भी सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगी कि महासभा में भौगोलिक प्रतिनिधित्व समुचित अनुपात में हो, महिलाओं और पुरुषों का भी सही अनुपात में प्रतिनिधित्व हो. साथ ही महासभा के प्रशासनिक और वित्तीय प्रबन्धन में पूर्ण पारदर्शिता यानी Total Transparency हो.

उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा कि वो महासभा के अध्यक्ष पद पर रहते हुए पूरी ज़िम्मेदारी के साथ आदर्श आचार संहिता का पालन करेंगी. साथ ही संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आदर्शों और सिद्धान्तों और महासभा के नियमों और प्रक्रिया का सख़्ती से पालन करेंगी.

“महासभा को अन्ततराष्ट्रीय सहयोग के मूल्य दिखाने होंगे”

संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंटॉनियो गुटेरेस ने भी महासभा को सम्बोधित किया. उन्होंने मरिया फ़रनेन्डा एस्पिनोस को अध्यक्ष इस पद पर निर्वाचित होने के लिए बधाई देते हुए प्रमुख मुद्दों पर नज़र रखने के लिए धन्यवाद दिया.

महासचिव का कहना था, “हमें बहुत से लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ठोस कार्रवाई करनी होगी. इनमें शान्ति अभियानों, महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता यानी Gender Parity लागू करने 2030 के टिकाऊ विकास एजेंडा के लिए धन जुटाने, दुनिया भर के युवाओं को ज़्यादा सक्षम और सशक्त बनाने, ग़रीबी दूर करने और लड़ाई-झगड़े ख़त्म करने और बहुत से अन्य मुद्दे शामिल हैं.”

उन्होंने विश्व नेताओं से सितम्बर के अन्तिम सप्ताह में होने वाले उच्च स्तरीय सत्र में शिरकत करने का आहवान करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों का एकजुट होकर सामना करने के लिए कमर कसने के लिए तैयार हो जाएँ.

महासचिव अंटॉनियो गुटेरेस ने अन्तरराष्ट्रीय सहयोग की महत्ता पर ज़ोर देते हुए कहा कि महासभा को एक साथ काम करने यानी सहकारिता की संस्कृति और माहौल को सच करके दिखाना होगा. उन्होंने इस मुहिम में संयुक्त राष्ट्र सचिवालय और ख़ुद के समर्थन का भरोसा भी दिलाया.